Tuesday, 1 November 2011

असर



अब वो मुझमें कमियाँ बताने लगा है,
चाहता है या फिर सताने लगा है ?

अजनबी थे तो दोनों तरफ जिंदगी थी,
अब वो हर बात अपने ढंग से बताने लगा है

कभी ये शर्त थी कि मुझे मेरे नाम से बुलाना,
अब वो सब नाम मुझे खुद से बताने लगा है

कुछ रोज तक खुदा सी इज्ज़त देता था मुझे,
अब वो प्यार से,मुझे पागल बताने लगा है

ये किस तरह का मर्ज़ पाल बैठे हो "कशिश"
अब वो हर दुआ बेअसर बताने लगा है

-kumar

21 comments:

जाट देवता (संदीप पवाँर) said...

रचना अच्छी लिखी है।

Rashmi Garg said...

nyc feelings....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर!
छठपूजा की शुभकामनाएँ!

Palak Jethwani said...

kumar sir....
ye to ASAR hai apke us ishq ka..
jo uski rago me lahu bnke smaane laga hai

संध्या शर्मा said...

अब वो मुझमें कमियाँ बताने लगा है,
चाहता है या फिर सताने लगा है ?
वाह क्या खूब कहा है...

वन्दना said...

्वाह वाह बहुत सुन्दर भाव संजोये हैं।

रश्मि प्रभा... said...

कुछ रोज तक खुदा सी इज्ज़त देता था मुझे,
अब वो प्यार से,मुझे पागल बताने लगा है
waah

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बहुत खूब!

सदा said...

वाह ...बहुत खूब लिखा है ।

Sunil Kumar said...

चाहता है या फिर सताने लगा है ?
असमंजस्य की स्थिति .......

SAJAN.AAWARA said...

अब वो मुझमें कमियाँ बताने लगा है,
चाहता है या फिर सताने लगा है ?

अजनबी थे तो दोनों तरफ जिंदगी थी,
अब वो हर बात अपने ढंग से बताने लगा है
bewfayi ki suruwat yahin se hoti hai..
lajwab parstuti.

jai hind jai bharat

संजय भास्कर said...

बहुत ही सुंदर ... बहुत प्रभावित करती हुई प्रस्तुति ।

संजय भास्कर
आदत....मुस्कुराने की
पर आपका स्वागत है
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

chandra said...

HEHHEEE, lagta hai pyaaar la swad chak hi lia aapne

Yashwant Mehta "Yash" said...

वाह.....कविता लाजवाब हैं....ऐसे भाव प्यार से गुजर कर ही निकलते हैं

Kailash C Sharma said...

बहुत खूब! बहुत सुंदर और भावपूर्ण...

हरकीरत ' हीर' said...

अब इश्क किया है तो सब्र भी कर इसमें यही कुछ होता है ......

dheerendra said...

कुमार जी,..आपने बहुत ही खूबसूरत रचना लिखी,
इसी तरह लिखते रहे,मेरी शुभकामनाये ..बधाई ..
मेरे नए पोस्ट-वजूद- में स्वागत है ...

अनुपमा त्रिपाठी... said...

कटु सत्य कहती हुई रचना ...
बहुत अच्छी लगी.

अनुपमा त्रिपाठी... said...

आपकी किसी पोस्ट की चर्चा है ... नयी पुरानी हलचल पर कल शनिवार 19-11-11 को | कृपया पधारें और अपने अमूल्य विचार ज़रूर दें...

अनुपमा पाठक said...

सुंदर एहसास!

Reena Maurya said...

कुछ रोज तक खुदा सी इज्ज़त देता था मुझे,
अब वो प्यार से,मुझे पागल बताने लगा है
सुंदर अहसास, गहरे भाव ओर बेहतरीन रचना..

जमीं पे कर चुके कायम हदें, चलो अब आसमां का रुख करें  - अरविन्द