कशिश
सीमाओं से परे इक अलग जहां बसाने की...
Tuesday, 13 September 2016
जमीं पे कर चुके कायम हदें,
चलो अब आसमां का रुख करें
- अरविन्द
Newer Posts
Older Posts
Home
Subscribe to:
Posts (Atom)
जमीं पे कर चुके कायम हदें, चलो अब आसमां का रुख करें - अरविन्द
हाइकू......
(१) कूड़े का ढेर ढूंढ़ता बचपन मासूम बच्चा (२) तुम और मैं बगावती दुनियाँ लड़ेंगे कैसे ? (३) चार दीवा...
हाइकू
( १ ) घुटती साँसें दोतरफा जिंदगी यह मौत है, ( २ ) बन जाता है एक भूखा इंसान गुनहगार ( ३ ) दिल से ...
बदलता इंसान ..
इंसानियत की दहलीज़ को पार कर, हैवानियत के संसार में खो गया है वो मार कर अपने ज़मीर को , खुद का ही क़ातिल ...