Thursday, 5 January 2012

कब...???




कभी चुपके से सुन तो सही,
मेरी सदा...
तेरे कई ख़त लिखे हैं इसमें...
मैं हर रोज इक ख़त पढता हूँ,
खुद से नज़र बचाकर...
मगर...
हर ख़त के बाद,
दिल कुछ पूछ बैठता है...
वो कब आएगा....????

-kumar

11 comments:

vidya said...

बहुत सुन्दर...
इन्तज़ार ऐसा ही होता है...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!

सदा said...

वाह ...बहुत खूब कहा है आपने ...

रेखा said...

सुन्दर अभिव्यक्ति ..

Urmi said...

आपको एवं आपके परिवार के सभी सदस्य को नये साल की ढेर सारी शुभकामनायें !
बहुत ख़ूबसूरत रचना !

Reena Maurya said...

खत पढकर पुरानी यादे फिर आंखो के सामने
आ जाती है...और मन विव्हल उठता है ...उसके इंतजार में उसे पाने कि चाह में..
चंद शब्द गहरे जजबात , सुंदर भावाभिव्यक्ती...

संध्या शर्मा said...

खूबसूरत जज़्बात...

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

बहुत खूब...

Rashmi Garg said...

nyc feelings...

anju(anu) choudhary said...

वाह...बहुत खूब

vandana said...

सुन्दर भाव ..

जमीं पे कर चुके कायम हदें, चलो अब आसमां का रुख करें  - अरविन्द