Monday, 27 August 2012

कुछ पल...




( १ )
तेरी यादें भी सफ़र से कम नहीं,
मैं ठहरकर भी चलता रहता हूँ    

( २ )
तेरी सादगी पर सैकड़ों अफ़साने लिख देता,
मगर अल्फाज़ भी अब तेरा दीदार करते हैं  

( ३ )
कितना मशरूफ है वो इश्क की शर्तें निभाने में,
इक हम हैं कि हर पल यूँ ही बर्बाद होते हैं 

( ४ )
तेरी उल्फ़त मुझे एक रोज़ बर्बाद कर देगी,
तुझे फुर्सत नही खुद से,मुझे मेरी खबर नहीं

( ५ )
मुझसे खफ़ा होना तो इस कदर होना,
कि मुद्दत्तें लग जायें तुझको मनाने में

( ६ )
मैं तुझको सोचता रहता हूँ खाबों में,खयालों में,
मेरी दीबानगी हर पल तेरे जैसे संवरती है

( ७ )
किसी भी दर्द की चौखट पर अब दिल नहीं झुकता,
कमबख्त बहुत रोता था,आँख की तरह

( ८ )
तकती आँखों की फिर आज तमन्ना है वही,
हँसे फिर आज मुझ पर मेरा चाहने वाला

( ९ )
तू हौंसला तो रख जरा,मेरे वजूद पे,
सारी दुनियाँ तेरा सजदा करेगी एक दिन

( १० )
कभी जो चलता था मेरी उंगली थामे,
आज वही मुझसे मेरा नाम पूछता है

- kumar

5 comments:

शालिनी कौशिक said...

तू हौंसला तो रख जरा,मेरे वजूद पे,
सारी दुनियाँ तेरा सजदा करेगी एक दिन
बहुत अच्छी बात कही है आपने.भगवान करे पूर्ण हो जाये.तुम मुझको क्या दे पाओगे?

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बहुत खूब


सादर

Anju (Anu) Chaudhary said...

वाह खूबसूरत अहसास

सदा said...

वाह ... बेहतरीन भाव लिए उत्‍कृष्‍ट प्रस्‍तुति।

संजय भास्कर said...

खूबसूरत अहसास

जमीं पे कर चुके कायम हदें, चलो अब आसमां का रुख करें  - अरविन्द