Thursday, 2 June 2011
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जमीं पे कर चुके कायम हदें, चलो अब आसमां का रुख करें - अरविन्द
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(१) कूड़े का ढेर ढूंढ़ता बचपन मासूम बच्चा (२) तुम और मैं बगावती दुनियाँ लड़ेंगे कैसे ? (३) चार दीवा...
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( १ ) घुटती साँसें दोतरफा जिंदगी यह मौत है, ( २ ) बन जाता है एक भूखा इंसान गुनहगार ( ३ ) दिल से ...
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इंसानियत की दहलीज़ को पार कर, हैवानियत के संसार में खो गया है वो मार कर अपने ज़मीर को , खुद का ही क़ातिल ...

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