Friday, 13 January 2012

मेरा चाहने वाला....




अपनी  पलकों  से  मेरे  खाब सजाने  वाला,
गया  इक  रोज  मुझे  छोड़,मेरा  चाहने  वाला

तकती  आँखों  की  फिर  आज  तमन्ना  है  वही,
हँसे  फिर  आज  मुझ पर,मेरा  चाहने  वाला

वो  नाज़िर  था  मेरा,संगदिल  नहीं  यारों,
खून  ए  जिगर  को  लोटेगा,मेरा  चाहने  वाला

काश  जाते  हुये  वो  हुनर  भी  दे  जाता  मुझको,
जैसे  भूला  है  मुझको, मेरा  चाहने  वाला

हम  तो  पत्थर  हैं,रोयेंगे  तो  क्या  रोयेंगे, ?
बस  कोई  पत्थर  ना  फिर पाये,मेरा  चाहने  वाला

-kumar

Thursday, 5 January 2012

कब...???




कभी चुपके से सुन तो सही,
मेरी सदा...
तेरे कई ख़त लिखे हैं इसमें...
मैं हर रोज इक ख़त पढता हूँ,
खुद से नज़र बचाकर...
मगर...
हर ख़त के बाद,
दिल कुछ पूछ बैठता है...
वो कब आएगा....????

-kumar