Monday, 24 December 2012

अब उठो



अब उठो पथिक संहार करो
जो आगे आये वार करो 
आँखों में भर लो अंगारे 
और हुँकारों से बात करो 

ये वक़्त नहीं चुप रहने का 
ये वक़्त नहीं सब सहने का 
जो सत्तारस में डूबे हैं 
उनकी गर्दन पे धार धरो 
अब उठो पथिक संहार करो...

बहरों को शोर सुनाई दे 
चहुँ ओर ये आग दिखाई दे 
जो मासूमों का दमन करे 
उस बल को तार तार करो 
अब उठो पथिक संहार करो...

- kumar

Monday, 17 December 2012

तलाश



हजारों लोग तो देखे मगर इन्सां नहीं देखा,
कहीं मासूमियत में लिपटा बच्चा नहीं देखा 

ये कौन लोग हैं तलवारें लिए हुये ?
मैने खून का प्यासा कोई मज़हब नहीं देखा

उसके गुलामों में,बदनाम थे बहुत,
हर पल यही कहना तुमसा नहीं देखा

कई बार खायी  है विश्वास की ठोकर,
जिसपे भरोसा था संग नहीं देखा 

कितने सवेरे हो गये जागते हुये ?
आँखों ने उसका कोई सपना नहीं देखा 

- kumar 


Saturday, 8 December 2012

अधूरी बातें...



(1)
कफ़न ओढ़े 
सड़क पर सोता 
भूखा पेट...

(2)
एक ज़िन्दगी में 
रोजाना होतीं 
हज़ारों मौतें...

(3)
तुम न आओ 
पेश मुझसे 
मेरे अपनों की तरह...

(4)
खंजर से 
अमन की बातें 
करते सफेदपोश...

(5)
हर रोज 
तनख्वा गिनता 
नौकरीपेशा...

- kumar 

Monday, 3 December 2012

ज़िद...




चल देखते हैं अब तेरी अदा  क्या है ?
ये बन्दा  फिर बतायेगा  मेरी रज़ा  क्या है 

तू अपनी बात पर रहना,मैं अपनी जिद पे कायम हूँ,
ये मसला हल तभी होगा,वरना मज़ा क्या है ?

बहुत आये और आयेंगे मगर हमसा ना आयेगा ,
बेबस सी तेरी नज़रें ये सोचें माजरा क्या है ?

तेरी नाकामियों के किस्से हम सबको सुनायेंगे,
तुझ बेअदब की इससे और बेहतर सज़ा क्या है ?

- kumar 


Wednesday, 17 October 2012

ख़ामोशी...




वो घिसटते कदमों से आ तो गया,
बन्द पलकों से देखता  भी रहा....
सिले लबों  से कहा भी बहुत कुछ....
मैं तिनका तिनका तोड़ता रहा,
वो लम्हा लम्हा गिनता रहा...
वक्त ए रुखसती पर बड़ा बेसब्र लगा,
पर जाते कदम इक बार भी न पलटे....
शायद एक और मुलाकात बाकी थी कहीं.... 

- kumar

Friday, 12 October 2012

इंतज़ार


मेरे दिल - ए - जज़्बात  मेरे प्यार  ( अरविन्द कुमार  जी ) के  लिए 













हर लम्हा इंतजार  करता  है  तेरा   

तू  आये  तो , वो ठहरे 
  
तुझसे  कुछ  पूछने  को  बेचैन  

हर  पल  ये  घड़ियाँ  रहती हैं   

मेरी  ऑंखें   दरवाज़े  पर  लगी हैं ,

कि  आयेगा तू  इक  दिन 

हक  से  पूछेगा  मुझसे

तू  ठीक  तो  है ?

मैं  नमी  के  साथ, झपका  दूंगी  आँखें 

तू  समा  लेगा  आगोश  मैं मुझे 

जाने  वो  पल  कब आएगा ?

पर  उम्मीद  है , 

आएगा  ज़रूर 




- Mrs. Nirmal pathak

Monday, 1 October 2012

क्या करता.... ???



तेरी बातों पे ऐतबार न करता,तो क्या करता ?
मरना था कई बार,जो इक बार मरता तो क्या मरता ?

कहकर ख़ुदा तुझको ख़ुदा से दुश्मनी ली,
ग़र यह नही करता,तो क्या करता ?

मिटाकर खुद को खुद से ही ढूँढे हैं निशाँ तेरे,
ग़र सज़दा नही करता,तो क्या करता ?

मैं मुज़रिम हूँ जमाने का सजा चाहता हूँ बस तुझसे,
ग़र उम्मीद ना करता,तो क्या करता ?

खफा है मुझसे अब तक तू कि मैं ज़ज्बाती हो गया,
ग़र यह बात ना करता,तो क्या करता....   ???

- Kumar 

Thursday, 30 August 2012

बदलता इंसान ..



इंसानियत  की  दहलीज़  को  पार  कर,
हैवानियत   के  संसार  में  खो  गया  है  वो 
मार  कर  अपने   ज़मीर   को ,
खुद  का  ही  क़ातिल  हो  गया  है  वो
अपने  पराये  का जो  भेद  जानता भी  न  था ,
आज  अहम् ( मैं )  के सागर  में  डूब  गया है  वो 
चंद  सिक्कों   की  खातिर  दगा  करने  लगा,  
प्रेम   की  भाषा  का  मोल  भूल  गया  है  वो 
खुद  में  ही  जब  इंसानियत  का  वजूद  मिट  गया, 
तो  दूसरों  से  उम्मीद  क्यों  करने  लगा  है  वो ?
कभी  खुदा  का  बन्दा  रहा  होगा ,
पर  आज  हैवान  सा  लगने  लगा  है  वो ...

Mrs. Nirmala kumar 





Monday, 27 August 2012

कुछ पल...




( १ )
तेरी यादें भी सफ़र से कम नहीं,
मैं ठहरकर भी चलता रहता हूँ    

( २ )
तेरी सादगी पर सैकड़ों अफ़साने लिख देता,
मगर अल्फाज़ भी अब तेरा दीदार करते हैं  

( ३ )
कितना मशरूफ है वो इश्क की शर्तें निभाने में,
इक हम हैं कि हर पल यूँ ही बर्बाद होते हैं 

( ४ )
तेरी उल्फ़त मुझे एक रोज़ बर्बाद कर देगी,
तुझे फुर्सत नही खुद से,मुझे मेरी खबर नहीं

( ५ )
मुझसे खफ़ा होना तो इस कदर होना,
कि मुद्दत्तें लग जायें तुझको मनाने में

( ६ )
मैं तुझको सोचता रहता हूँ खाबों में,खयालों में,
मेरी दीबानगी हर पल तेरे जैसे संवरती है

( ७ )
किसी भी दर्द की चौखट पर अब दिल नहीं झुकता,
कमबख्त बहुत रोता था,आँख की तरह

( ८ )
तकती आँखों की फिर आज तमन्ना है वही,
हँसे फिर आज मुझ पर मेरा चाहने वाला

( ९ )
तू हौंसला तो रख जरा,मेरे वजूद पे,
सारी दुनियाँ तेरा सजदा करेगी एक दिन

( १० )
कभी जो चलता था मेरी उंगली थामे,
आज वही मुझसे मेरा नाम पूछता है

- kumar

Thursday, 23 August 2012

एक ख्वाब ऐसा भी...

( मेरे ब्लॉग  पर पहली बार....मेरे लिए कुछ लिखता मेरा प्यार....)



ख्वाब  था  इक रोज़  मेरे लिए तू , पर मुझे सुकून देता था वो  ख्वाब 
तेरी  बातें , तेरी  नादानी , तेरा वो समझाना मुझे  
सब जानते  हुए  भी  नादां  बनी  बैठी  थी 
पर  सच  से  कब तक  मुँह   मोड़ती
तू  आया  इक दिन  मेरे  लबों  की  हँसी  लेकर 
देख , आज  भी  वो  मुस्कुराहट   बरकरार  है
टूट  जाता  अगर  मेरा  ख्वाब  ऐसे  ही,
तो  ना  मैं  होती , ना  मुझे  बनाने  वाला , ना  वो  ख्वाब  दिखाने  वाला  
इक  दिन  आँखें   मीचे  सोयी  थी , तूने  धीरे  से  खोला  उन्हें ,
और  कहा , देख  तो  ज़रा  तेरा ख्वाब  मुकम्मल  है
हाँ  मुझे  याद  आता  है , वही  ख्वाब  जो  इक  रोज़  देखा  था 
आज  हकीकत   बन  सामने  है  मेरे ...

-  Mrs.Nirmal kumar



Saturday, 11 August 2012

हाइकू




१ )
घुटती साँसें
दोतरफा  जिंदगी 
यह  मौत  है,

( २ )
बन  जाता  है
एक  भूखा  इंसान
गुनहगार 

( ३ )
दिल  से  पूछो
मेरा  नसीब  क्या  है 
ख़ाली  हथेली,

( ४ )
कडुवा  सच 
झूठी  दुनिया  सारी
अजीब  है  ना,

( ५ )
धुंधले  शब्द 
गहराती  तस्वीर 
मेरी  कहानी,

- kumar

Wednesday, 1 August 2012

हाइकू......



(१)
कूड़े का  ढेर
ढूंढ़ता बचपन
मासूम बच्चा

(२)
तुम  और  मैं
बगावती   दुनियाँ 
लड़ेंगे  कैसे  ?

(३) 
चार  दीवारी 
उम्र  भर  की  कैद 
बेबस  खुदा

(४)
सब  पराये 
तुमसा  नही  कोई 
मेरा  अपना 

(५)
दंगे  फ़साद 
हर  सुबह  ऐसी 
बीरानी  रात

- kumar 

Saturday, 14 July 2012

अधूरी बातें...




()
भूखे बच्चे को
थपकियों से बहलाता,
सूखा  आँचल....

()
लड़ रहा हूँ
अपनों में रहकर 
अपनों से...

()
बढ़ जाती है
हर रिश्ते की बोली
बुरे वक़्त में...

()
और पिलाओ मुझे
दिल खाली है
जाम नहीं...

()
ये वक़्त
क्या आज भी वही है
जो तब था...

()
मज़हबी लोग
करते बँटवारा
मासूम खुदा का...

()
अधखुली आँखें
तेरा खयाल
अब क्या करूँ...?


- kumar 

Wednesday, 4 July 2012

अधूरी बातें...




(१)
असर ए  इश्क को
अश्कों से धोता
सिरफिरा आशिक़....

(२)
वक़्त सी झुर्रियां
कहती कहानी
मेरे चेहरे पे...

(३)
टीस
बढ़ सी जाती है
तुझे मिलकर...

(४)
तुझे चाहूँ
या ना चाहूँ
बड़ी उलझन...

(५)
अरसे बाद
तेरा मिलना
ज़ख्म खिल उठे...

- kumar

Saturday, 26 May 2012

कुछ मिले ना मिले...




कुछ मिले  ना मिले,उसके आंचल में छाँव मिले,
जन्नत मिली.जो मुझे माँ के पाँव मिले

बदल सा गया हूँ शहर में रहते रहते,
अब दोस्त मिले तो गाँव सा बफादार मिले

अजब हाल है कि वक़्त नही मरने को,
ज़िन्दगी कभी तुझे भी मेरा ख़याल  मिले

चलो एक बार फिर दिल पे पत्थर रख लें,
अदब से बोलें,गर वो मुस्कुरा के मिले

फ़र्ज़,ईमान,रूह,जमीर सब देखे बेचकर,
अब मिले तो कोई खुदा का खरीददार मिले

सच अच्छा है,मगर हर जगह बोला नहीं जाता,
ये वो तजुर्बे हैं जो हमें समाज से मिले

- कुमार 


Friday, 6 April 2012

कशमकश...





तेरी हर बात पर मैं कितना ऐतबार करता हूँ 
नादाँ हूँ,या तू मुझसे अन्जान बनता हैं ?


 कभी तो देख डूबकर मेरी आखोँ मेँ हमनशीँ,
दीबाना हूँ,या तू मुझसे अन्जान बनता है  ?


मुझे मौका तो दे या कर ले फ़ना खुद मेँ,
बेसबर हूँ,या तू मुझसे अन्जान बनता है ?


तेरी इक इक अदा मेरी नज़रों मेँ क़ैद है,
आइना हुँ,या तू मुझसे अन्जान बनता है ?


तेरे कदमों की आहट से रौशन है मेरा नसीब,
ज़र्रा हूँ,या तू मुझसे अन्जान बनता है ?


खुदा कैसा मेहरबां है तेरी सादादिली पे भी,
वो तुझसा है या तू मुझसे अन्जान बनता है ?


- kumar

Friday, 13 January 2012

मेरा चाहने वाला....




अपनी  पलकों  से  मेरे  खाब सजाने  वाला,
गया  इक  रोज  मुझे  छोड़,मेरा  चाहने  वाला

तकती  आँखों  की  फिर  आज  तमन्ना  है  वही,
हँसे  फिर  आज  मुझ पर,मेरा  चाहने  वाला

वो  नाज़िर  था  मेरा,संगदिल  नहीं  यारों,
खून  ए  जिगर  को  लोटेगा,मेरा  चाहने  वाला

काश  जाते  हुये  वो  हुनर  भी  दे  जाता  मुझको,
जैसे  भूला  है  मुझको, मेरा  चाहने  वाला

हम  तो  पत्थर  हैं,रोयेंगे  तो  क्या  रोयेंगे, ?
बस  कोई  पत्थर  ना  फिर पाये,मेरा  चाहने  वाला

-kumar

Thursday, 5 January 2012

कब...???




कभी चुपके से सुन तो सही,
मेरी सदा...
तेरे कई ख़त लिखे हैं इसमें...
मैं हर रोज इक ख़त पढता हूँ,
खुद से नज़र बचाकर...
मगर...
हर ख़त के बाद,
दिल कुछ पूछ बैठता है...
वो कब आएगा....????

-kumar